नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि कर्जधारकों को चक्रवृद्धि ब्याज में काफी राहत दे दी गई है। सरकार इससे ज्यादा राहत प्रदान नहीं कर सकती। सुप्रीम कोर्ट को सरकार की नीतियों में दखल नहीं देना चाहिए। जस्टिस अशोक भूषण, मुकेश कुमार शाह और सुभाष रेड्डी की बेंच के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि तकनीकी विशेषज्ञों से परामर्श के बाद राहत पैकेज दिए गए हैं। सरकार लोगों की परेशानियों को समझती है, लेकिन सरकार की भी अपनी सीमाएं हैं। उसे अपने वित्तीय ढांचे के अनुसार ही राहत देनी होती है। एसजी ने कहा कि आत्मनिर्भर स्कीम के तहत लोगों को राहत प्रदान की गई है। लगभग हर सेक्टर को मदद दी गई है। बिजली वितरण कंपनियों को 90 हजार 800 करोड़ का पैकेज दिया गया है, ताकि वह अपना बकाया अदा कर सके। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कोविड-19 से प्रभावित लगभग हर सेक्टर की पहचान की गई। यह कहना सही नहीं है कि सरकार ने उचित धनराशि उपलब्ध नहीं कराई। कामथ समिति की सिफारिश पर बड़े कर्जधारकों के लोन को सरल बनाया गया। छोटे कर्जधारकों के ऋण को भी बैंकों ने पुनर्गठित किया। आरबीआई ने सकरुलर जारी करके यह काम किया। बैंकों पर यह निर्देश थोपा गया। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि छोटे कर्जदारों को कोरोना काल के आर्थिक संकट से उबारने के लिए केंद्र सरकार ने चक्रवृद्धि ब्याज पर माफी की विस्तृत योजना को अमलीजामा पहनाया। दो करोड़ तक के कर्जदारों से ब्याज पर ब्याज नहीं वसूलने का फामरूला पांच नवम्बर से लागू हो गया है। लघु एवं मझौले उद्योगों (एमएसएमई), एजूकेशन, हाउसिंग, उपभोक्ता वस्तु, क्रेडिट कार्ड, ऑटोमोबाइल, पर्सनल, प्रोफेशनल और कन्जम्शन लोन लेने वाले लोगों को स्कीम का लाभ दिया गया है। एक मार्च से 31 अगस्त, 2020 तक की अवधि में ब्याज पर ब्याज पर राहत दी गई है। छह माह के चक्रवृद्धि ब्याज और साधारण ब्याज के अंतर को बैंक तथा अन्य वित्तीय संस्थान कर्जदार के खाते में ट्रांसफर कर देंगे।

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