नई दिल्ली : भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवने ने गुरुवार को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में नौसेना डॉकयार्ड में स्वदेश निर्मित आईएनएस कवरत्ती को भारतीय नौसेना में शामिल किया। पनडुब्बी रोधी युद्धक क्षमता से लैस आईएनएस कवरत्ती एक भारतीय प्रोजेक्ट के तहत चार स्वदेशी जहाजों में से आखिरी जहाज है। इस मौके पर भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवने ने कहा, “आईएनएस कवरत्ती का कमीशन हमारे देश के समुद्री लक्ष्यों को हासिल करने के लिए एक और महत्वपूर्ण कदम है। मैं टीम कवरत्ती को अपनी शुभकामनाएं देता हूं। इसका डिजाइन नौसेना की शाखा नौसेना डिजाइन निदेशालय और गार्डन रिच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने यह जंगी पोत तैयार किया है। आईएनएस कवरत्ती (पी-31) प्रोजेक्ट 28 (कमरोटा श्रेणी) के तहत तैयार किया गया है।
एक अधिकारी ने कहा कि द्वीपों के समूह लक्षद्वीप (केंद्र शासित प्रदेश) की राजधानी के नाम पर आईएनएस कवरत्ती का नाम रखा गया है। उन्होंने बताया कि इसका निर्माण उच्च ग्रेड डीएमआर 249ए स्टील के उपयोग से किया गया है और इसे भारत में निर्मित सबसे शक्तिशाली एएसडब्ल्यू जहाजों में से एक माना जा सकता है। यह 3,300 टन के विस्थापन के साथ इसकी लंबाई 109 मीटर, जबकि चौड़ाई 14 मीटर है। जहाज चार डीजल इंजन द्वारा संचालित किया जाता है।
इस युद्धपोत की सबसे बड़ी खासियत है कि यह रडार की पकड़ में नहीं आता है। आईएनएस कवरत्ती अत्याधुनिक हथियार प्रणाली से लैस है। इसमें, ऐसे सेंसर लगे हैं जो पनडुब्बियों का पता लगाने और उनका पीछा करने में सक्षम हैं। इसमें रडार से बच निकलने के लिए ऐसे फीचर्स हैं जो कि दुश्मन की पहचान में आने के लिए जहाज को कम संवेदनशील बनाते हैं।

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