नई दिल्ली : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में नौकरी की इच्छा रखने वाले भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स को एक बार फिर करारा झटका दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत अब अमेरिका की सरकारी एजेंसियां एच -1बी वीजा धारकों को नौकरी पर नहीं रख सकेंगी। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने 23 जून को यह घोषणा की थी कि इस साल के अंत तक H-1B वीजा और अन्य वर्क वीजा के तहत किसी भी विदेशी को अमेरिका में नौकरी नहीं दी जाएगी। अमेरिका में इस साल चुनाव होना है और ट्रंप प्रशासन ने यह फैसला अमेरिकी वर्कर्स के हितों को बचाने के लिए लिया था।
अमेरिकी लोगों के लिए नौकरियों के लिए ट्रंप का फैसला
ट्रंप ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि आज मैं कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर रहा हूं। जिसके बाद फेडरल सरकार अब अमेरिकियों को आसानी से नौकरी दे सकेगी। ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि उनका प्रशासन सस्ते विदेशी श्रमिकों के चलते अमेरिकियों का हक नहीं बर्दाश्त करेगा। ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार यह बर्दाश्त नहीं करेगी कि सस्ते विदेशी श्रमिकों के लिए कड़ी मेहनत करने वाले अमेरिकी नागरिकों को नौकरी से हटाया जाए। उन्होंने कहा, ‘हमने तय किया है कि अब H-1B वीजा की वजह से किसी अमेरिकी वर्कर की नौकरी नहीं जाएगी। H-1B वीजा का इस्तेमाल बड़े पदों पर नियुक्ति के लिए किया जाएगा ताकि अमेरिकी लोगों के लिए नौकरियों के अवसर खोले जा सकें।’
क्या है एच-1बी वीजा
एच-1बी वीजा एक गैर आप्रवासी वीजा है, जो अमेरिकी कंपनियों को विदेशी विशेषज्ञों को नौकरी पर रखने की अनुमति देता है। अमेरिका में काम करने वाले ज्यादातर भारतीय आइटी पेशेवर इसी वीजा पर वहां जाते हैं। अमेरिकी टेक कंपनियां हर साल इसी वीजा पर भारत और चीन समेत दूसरे देशों से हजारों कर्मचारियों को नौकरी पर रखती हैं।

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