चीन की हेकड़ी टूटी, जहां नही हुआ समझौता, वहां भी पीछे हटना शुरू

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नई दिल्ली। भारत की कूटनीति ने चीन को उसकी जमीन दिखा दी है। लद्धाख में लंबे समय तक अड़े रहने के बाद अब चीन ने वापिस लौटना शुरू कर दिया है। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के नजदीक पैंगोंग त्सो लेक में चीन की सेनाएं वापिस लौट रही हैं। बंकर गिराए जा रहे हैं। टेंट उखाड़े जा रहे हैं। चीन के हौसले इस कदर पस्त हो चुके हैं कि वह लद्दाख के साथ ही सिक्किम के नाकुला में भी पीछे हट रहा है। मई 2020 से ही चीन पूर्वी लद्दाख में घुस आया था। तभी से वह अड़ा हुआ था। मगर भारत की रक्षा नीति और कूटनीति ने उसे बुरी तरह मात दी है। पैंगोंग त्सो से जो तस्वीरें आ रही हैं, वे बताती हैं कि भारत ने इस समझौते में क्या हासिल किया है। पैंगोग के नार्थ में चीन की सेना पीछे हटती हुई साफ दिखाई दे रही है। चीन ने फिंगर 8 से पूर्व में श्रीजप प्लेन की तरफ कदम बढ़ाए हैं। वहीं पैंगोंग त्सो के दक्षिण हिस्से में भी हरकत हुई है। उसने यहां करीब 220 चीनी लाइट टैंक पीछे हटाए हैं।
पैंगोंग के दक्षिणी इलाके में भारत ने चीन को चौंका दिया था। 29-30 अगस्त की झड़प में भारत ने यहां की सारी फायदेमंद चोटियों को अपने नियंत्रण में ले लिया था। हमारी सेना ने 29-30 अगस्त के बीच की रात रणनीतिक महत्व की सामरिक कार्रवाई की और चुशूल ‘बाउल’ के सामने कैलाश पहाड़ों पर अपनी शक्ति का ध्वज फहरा दिया।
सेना ने कैलाश के पहाड़ों में पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे परसामरिक महत्व की सभी चोटियों पर अपनी पकड़ बना ली है जिनमें हेलमेट, ब्लैक टॉप, गुरुंग हिल, मागर हिल, रेज़ांग ला, और रेचिना ला चोटियां शामिल हैं। ये सारी एलएसी के अंदर भारतीय इलाके में हैं, जहां 1962 की भारत-चीन लड़ाई में जोरदार जंग हुई थी।चीन के लिए ये होश फाख्ता कर देने वाला वाकया था। इसकी वजह यह था कि तिब्बत-झिंजियांग हाइवे (जी-219) भारतीय सेना की स्ट्राइक रेंज में आ चुका था। यह एक सर्वमान्य सिद्धांत है कि कैलाश रेंज में पैंगोंग सो से रेचिन ला तक की चोटियों पर जिसका कब्जा होगा वह पूरब से पश्चिम के सभी मार्गों पर हावी रहेगा।


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