नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 खत्म किए जाने के बाद पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को घेरने की कवायद में जुटा है लेकिन उसे उम्मीद के मुताबिक कामयाबी मिलती नहीं दिख रही। अब यह बात पाक के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भी अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में कोई हार लेकर नहीं खड़ा है और इसके लिए हमें खासा संघर्ष करना पड़ेगा। शाह महमूद कुरेशी ने कहा, ”यूएन सुरक्षा परिषद में हमें समर्थन मिलना मुश्किल है, हमें मूर्खों के स्वर्ग में नहीं रहना चाहिए। पाकिस्तानी और कश्मीरियों को ये जानना चाहिए कि कोई आपके लिए खड़ा नहीं है, आपको जद्दोजहद करनी होगी, जज्बात उभारना आसान है। बाएं हाथ का काम है, मुझे दो मिनट लगेंगे, लेकिन मसले को आगे ले जाना कठिन है। सुरक्षा परिषद के 5 स्थायी सदस्य हैं कोई भी वीटो का इस्तेमाल कर सकता है।”

शाह महमूद कुरेशी ने आगे कहा, ‘’संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के स्‍थायी सदस्‍यों के भी निजी हित भारत से हैं और उन्‍होंने वहां पर अरबों का निवेश किया हुआ है। ऐसे में वह पाकिस्‍तान का साथ देंगे यह बेहद मुश्किल है।’’ हालांकि उन्होंने कहा कि देश कश्मीरियों के मुद्दे पर हर मंच पर लड़ रहा है। कुरैशी से सोमवार को विपक्षी दलों से कश्मीर पर एकसाथ आने का आह्वान करते हुए कहा कि मुद्दे पर देश का एकजुट रुख होना चाहिए।

कुरैशी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर स्थित मुजफ्फराबाद में मीडिया को संबोधित कर रहे थे जहां उन्होंने ईद उल अजहा मनाया और एक शरणार्थी शिविर भी गए। उन्होंने कहा कि पूरा पाकिस्तान देश और राजनीतिक नेतृत्व कश्मीर के मुद्दे पर एकजुट है और कश्मीरियों के समर्थन में 14 अगस्त को एक आवाज उठेगी।

भारत द्वारा जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के बाद पाकिस्तान ने घोषणा की है कि वह 14 अगस्त को कश्मीर एकजुटता दिवस और 15 अगस्त को काला दिवस के तौर पर मनाएगा।

कुरैशी ने पाकिस्तान में राजनीतिक दलों के बीच कश्मीर पर एकजुटता का आह्वान किया और चेतावनी दी कि मुद्दे पर राजनीति से इस उद्देश्य को नुकसान हो सकता है। उन्होंने पाकिस्तान के राजनीतिक दलों से कश्मीर मुद्दे पर साथ आने का आग्रह किया और कहा कि इस मामले पर पाकिस्तान का एकजुट रुख होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे बीच मतभेद हैं लेकिन कश्मीर मुद्दे पर कोई मतभेद नहीं है। यदि कोई मतभेद होता, एक संयुक्त प्रस्ताव नहीं पारित किया गया होता।’’

गत सप्ताह संसद की एक संयुक्त बैठक में भारत के खिलाफ प्रस्ताव की भाषा को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच मतभेद उत्पन्न हो गए थे। कुरैशी ने कहा कि भारत द्वारा कश्मीर का विशेष दर्जा एकतरफा समाप्त करने से कश्मीरियों के पास इसके खिलाफ खड़े होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। भारत ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर खंडों को समाप्त करना उसका आंतरिक मामला है।

गिलगिट-बाल्टिस्तान को प्रांत का दर्जा देने के बारे में एक सवाल पर कुरैशी ने कहा कि ऐसा करने से कश्मीर उद्देश्य और पाकिस्तान के रुख को नुकसान होगा। उन्होंने कहा, ‘‘इस पर कैबिनेट में चर्चा की गई थी क्योंकि इसकी काफी मांग उठी है लेकिन हम ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे जिससे कश्मीर पर हमारी विधिक स्थिति को नुकसान पहुंचे।’’

इससे पहले कुरैशी ने कश्मीरियों के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए मुजफ्फराबाद में ईद की नमाज अदा की। कुरैशी ने कहा कि प्रधानमंत्री इमरान खान 14 अगस्त को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का दौरा करेंगे और उसकी विधानसभा को संबोधित भी करेंगे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने कश्मीर का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ले जाने का निर्णय किया है और चीन ने इस उद्देश्य के लिए पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया है।

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