Mumbai: छपाक एसिड-हमले जैसे जघन्य अपराध पर बनी एक साहसिक फिल्म है। यह एसिड अटैक सर्वाइवर के दर्द को महसूस कराती है। एसिड-अटैक सर्वाइवर मालती (दीपिका पादुकोण) की जिंदगी के इर्द-गिर्द घूमती यह कहानी उनके जीवन के 13 साल कवर करती है। 12th क्लास से शुरू हुई मालती की इस कहानी में, हम उनके जीवन के उतार-चढ़ाव देखते हैं। एसिड अटैक होने के बाद मालती नौकरी के लिए तलाश शुरू करती है और अमोल (विक्रांत मैसी) से टकराती है। अमोल, छाया नाम का एक एनजीओ चलाता है जो एसिड-अटैक सर्वाइवर्स की मदद करता है। मालती एनजीओ को चलाने में मदद करती है और अन्य सर्वाइवर्स के साथ अपनी जर्नी को आगे बढाती है। वह एसिड की खुली बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के लिए जनहित याचिका (पब्लिश इंटरेस्ट लिटिगेशन) दायर करती है। असल में मालती का मानना यह है कि एसिड की कुछ बूंदें उससे सब कुछ नहीं ले सकती हैं। मेघना गुलज़ार की पहले ही दो शानदार फिल्मों (तलवार, राज़ी) में से कोई भी उन्होंने अकेले नहीं लिखी है। ‘तलवार’ विशाल भारद्वाज और ‘राजी’ की कहानी में हरिंदर सिक्का को ऑनबोर्ड किया गया था। ‘छपाक’ में भी, कहानी और डायलॉग्स के लिए अतिका चौहान (मार्गरीटा विद ए स्ट्रॉ, वेटिंग) ने काम किया है। वह कहानी के बेस को सही तरीके से मैनेज करके चली हैं, जिससे पहले हाफ तक फिल्म काफी सफल लगती है। इंटरवल तक फिल्म में सब कुछ हो चुका होता है, इसलिए सवाल आता है अब आगे क्या!

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