नई दिल्ली। देश में कोरोना के सबसे अधिक मामले महाराष्ट्र से सामने आ रहे हैं। ऐसे में सीएम उद्धव ठाकरे ने राज्य को कई जोन में बांटने का काम किया है। जारी लॉकडाउन के बीच उद्धव ठाकरे ने 20 अप्रैल से ग्रीन और ऑरेंज जोन में उद्योग-धंधों को हरी झंडी दे दी है। कोरोना संकट में आर्थिक तंगी से निपटने के लिए सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा कि कोरोना से जंग में कहीं हम आर्थिक हालात से ना जूझने लगें, इसलिए हम धीरे-धीरे शुरुआत कर रहे हैं।
रविवार को सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा कि, 24 मार्च से जो सभी चीजें बंद हुई हैं, उसके चलते कई आर्थिक संकट आए हैं, जिन्हें अब चलाने की जरूरत है। 20 अप्रैल से हम कुछ जगहों पर उद्योग-धंधों को परमिशन दे रहे हैं, ताकि आर्थिक स्थिति खराब होने से बचे। कुछ इलाकों में जीरो है कोरोना का असर। कुछ जगह बढ़ा नहीं है। ग्रीन जोन और ऑरेंज जोन में उद्योग को परमिशन दे रहे हैं। जहां-जहां संभव है वहां-वहां कुछ चीजें शुरू की जा रही हैं। उसका डिटेल्स दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि, जो युद्ध चल रहा है, उसका इंतजार कर रहा हूं कब खत्म होगा। अगर ये शत्रु दिखता तो उसका हम कब का खात्मा कर चुके होते, लेकिन ये दिखता नहीं है। शत्रु दिख नहीं रहा है, युद्ध कब तक खत्म होगा ये सवाल मेरे मन में भी है। हम लोग जिद से लड़ रहे हैं। संयम से लड़ रहे हैं। कल पूरे 6 हफ्ते पूरे होंगे इस युद्ध के।
जहां कोरोना ने दखल नहीं दिया है उसको लेकर उद्धव ने कहा कि, जिन जिलों में अभी तक कोरोना की दखल नहीं हुआ है, वहां ग्रीन जोन है। वहां सिर्फ जरूरत की चीजों को लेकर लाने और ले जाने की परमिशन दी है। लेकिन यहां किसी भी तरह से लोगों को एक गांव से दूसरे गांव जाने पर पाबंदी है।
सीएम ने कहा कि, सभी उद्योग करने वालो से कहा है कि अपने मजदूरों का ख्याल रखें। माल का ट्रांसपोर्ट करना है वायरस का नहीं, इसका ख्याल रखें। कोरोना से लड़ाई लड़ते-लड़ते कहीं हम आर्थिक हालात से ना जूझने लगें, इसलिए हम धीरे-धीरे शुरुआत कर रहे हैं। कृषि को लेकर कोई बंधन नहीं है, जीवन के लिए जरूरी वस्तुओं पर कोई बंधन नहीं है। केंद्र सरकार द्वारा जो नियम आया है उस पर अमल होगा। सिर्फ माल के परिवहन को इजाजत दी है। किसी और आदमी को एक जिले से दूसरे जिले में जाने की परमिशन नही दे रहे हैं।
अखबारों के वितरण पर उन्होंने कहा कि, अखबारों पर कोई पाबंदी नहीं है लेकिन अभी हालात ऐसे नहीं है कि घर-घर जाकर पेपर दिए जा सकें। महाराष्ट्र के हित के लिए जो जरूरी है वो करूंगा। कृपा करके सभी सहयोग दें। इस समय मुंबई और पुणे अभी भी रेड जोन में हैं। ऐसे में न्यूजपेपर छपाई पर पाबंदी नहीं है। लेकिन घर-घर बांटने पर पाबंदी है।
महाराष्ट्र सीएम ने कहा कि, कुछ छोटे-छोटे बच्चे अपने जन्मदिन और खेल के लिए अपने जमा पैसा दे रहे हैं, इनका मैं धन्यवाद करता हूं। बच्चों तुम घबराओ मत हम हैं, निधि के लिए लोगों का पैसा आ रहा है। सीएसआर फंड के लिए पैसे जमा करने का अलग जरिया बनाया है, ऐसे कई योजना की है। मेरा पत्रकारों से निवेदन है, जैसा अभी तक आप लोगों ने साथ दिया, वैसे ही आगे भी साथ दें। अभी भी मुख्य्मंत्री फंड में पैसे आ रहे है। सीएसआर मामले को लेकर मैं किसी भी तरह की राजनीति में नहीं पड़ना चाहता।
उन्होंंने कहा कि, महाराष्ट्र में कुल 66696 टेस्ट किए गए, इसमें से 95 फीसदी नेगेटिव हैं। 3600 पॉजिटिव, 350 लोगों को इसमें ठीक कर घर छोड़ा गया है। 52 मरीजों की हालत गंभीर है। सब लोग बोल रहे हैं, टेस्ट करो टेस्ट करो हम टेस्ट कर रहे हैं। दूसरे प्रदेश के लोगों के लिए उद्धव ठाकरे कुछ नंबर्स जारी करते हुए कहा कि, दूसरे प्रदेश के लोग चिंता न करें। महाराष्ट्र में आपको किसी प्रकार की कोई कोई तकलीफ नहीं है, सब मिल रहा है और सुरक्षित हैं। अगर किसी को अन्य प्रकार की मदत की जरूरत होगी तो कुछ सामाजिक संस्था भी मदद के लिए आगे आ रही हैं। कुछ नंबर है जो मैं दे रहा हूं। नोट करें- मुंबई महानगरपालिका और बिरला सेवा-1800120820050। आदिवासी विभाग और प्रॉजेक्ट मुंबई और प्रफुल्ल- 18001024040।
महाराष्ट्र सीएम ने कहा कि, अभी तीन तरह के मरीज हमारे पास हैं- गंभीर, मध्यम और अत्यंत गंभीर। कोई भी लक्षण हो उसे छुपाएं नहीं, उसका तुरंत इलाज करें। हमारी दुविधा ये है कि बहुत सारे मामले आखिरी चरण में हमारे पास आ रहे हैं। मैंने कई बार कहा है कि कोरोना हो गया तो खत्म ऐसा न सोचें। इलाज हो रहा है कोरोना हुआ है तो सब खत्म ऐसा नहीं है। लोग सही भी हो रहे हैं, सही समय पर अपना इलाज कराएं। इसलिए मेरा सभी से निवेदन है कि सर्दी, खांसी या कुछ भी लक्षण दिखे तो घर में इलाज ना करें, सीधा डॉक्टर से संपर्क करें।
उन्होंने कहा कि, कोरोना मतलब जिंदगी खत्म ऐसा नहीं है। प्राइवेट डॉक्टर से बात की है और सभी ने आश्वासन दिया है कि वो अपने क्लीनिक और दवाखाने खोलेंगे। जो कोरोना के मरीज नहीं हैं उनके इलाज के लिए। बहुत से गंभीर मरीज भी अच्छे होकर घर गए हैं। कई लोगों को अलग-अलग बीमारी है इसलिए प्राइवेट डॉक्टरों को अपना दवाखाना चालू रखना है।

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