अक्सर रक्षाबंधन के दिन भद्रा की स्थिति रहती है, ऐसे में भद्रा समाप्त होने के बाद ही राखी बांधने का शुभ मुहूर्त होता है, लेकिन इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा नहीं होगी। सुबह से लेकर पूरा दिन राखी बांधने के लिए श्रेष्ठ रहेगा। भद्रा एक दिन पहले 14 अगस्त को 4.51 पर समाप्त होजाएगी, और 15 अगस्त को भद्रा की स्थिति नहीं रहेगी, इसलिए भद्रा का कोई दोष रक्षाबंधन पर नहीं रहेगा।
रक्षा बंधन 15 अगस्त 2019 वार गुरुवार को रक्षाबंधन के शुभ इस प्रकार है।
मुहूर्त-
पूर्णिमा तिथि आरंभ – 15.46 (14 अगस्त)
पूर्णिमा तिथि समाप्त- 17.59 (15 अगस्त)
प्रात: शुभ मुहूर्त में 06.04 से 07.41 तक फिर चर में 10.54 से 12.31 तक फिर लाभ में 12.31 से 14.08 तक फिर अमृत में 14.08 से 15.44 तक। इसके बाद फिर शुभ में 17.59।

अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिये हर बहन रक्षा बंधन के दिन का इंतजार करती है। श्रावण मास की पूर्णिमा को यह पर्व मनाया जाता है। इस पर्व को मनाने के पिछे कहावत हैं। यदि इसकी शुरूआत के बारे में देखें तो यह भाई-बहन का त्यौहार नहीं बल्कि विजय प्राप्ति के लिए किया गया रक्षा बंधन है। भविष्य पुराण के अनुसार जो कथा मिलती है वह इस प्रकार है।
बहुत समय पहले की बाद है देवताओं और असुरों में युद्ध छिड़ा हुआ था लगातार 12 साल तक युद्ध चलता रहा और अंततरू असुरों ने देवताओं पर विजय प्राप्त कर देवराज इंद्र के सिंहासन सहित तीनों लोकों को जीत लिया। इसके बाद इंद्र देवताओं के गुरु, ग्रह बृहस्पति के पास के गये और सलाह मांगी। बृहस्पति ने इन्हें मंत्रोच्चारण के साथ रक्षा विधान करने को कहा। श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन गुरू बृहस्पति ने रक्षा विधान संस्कार आरंभ किया। इस रक्षा विधान के दौरान मंत्रोच्चारण से रक्षा पोटली को मजबूत किया गया। पूजा के बाद इस पोटली को देवराज इंद्र की पत्नी शचि जिन्हें इंद्राणी भी कहा जाता है ने इस रक्षा पोटली के देवराज इंद्र के दाहिने हाथ पर बांधा। इसकी ताकत से ही देवराज इंद्र असुरों को हराने और अपना खोया राज्य वापस पाने में कामयाब हुए।
वर्तमान में यह त्यौहार बहन-भाई के प्यार का पर्याय बन चुका है, कहा जा सकता है कि यह भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को और गहरा करने वाला पर्व है। एक ओर जहां भाई-बहन के प्रति अपने दायित्व निभाने का वचन बहन को देता है, तो दूसरी ओर बहन भी भाई की लंबी उम्र के लिये उपवास रखती है। इस दिन भाई की कलाई पर जो राखी बहन बांधती है वह सिर्फ रेशम की डोर या धागा मात्र नहीं होती बल्कि वह बहन-भाई के अटूट और पवित्र प्रेम का बंधन और रक्षा पोटली जैसी शक्ति भी उस साधारण से नजर आने वाले धागे में निहित होती है।

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