नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुमान को काफी कम बताया है। IMF ने, 2019-20 वित्त वर्ष के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर (GDP) के अनुमान को कम कर 4.8 प्रतिशत कर दिया है। गैर-बैंकिग वित्तीय कंपनियों में दबाव और ग्रामीण भारत में आय वृद्धि कमजोर रहने का हवाला देते हुए वृद्धि अनुमान को कम किया गया है। इसके पीछे के कारण को लेकर आईएमएफ ने कहा है कि भारत और इसके जैसे अन्य उभरते देशों में सुस्ती की वजह दुनिया के ग्रोथ अनुमान को उसे घटाना पड़ा है। हालांकि इसके उलट आईएमएफ ने यह उम्मीद भी जताई है कि अमेरिका-चीन के बीच व्यापारिक डील से जल्दी ही दुनिया की मैन्युफैक्चरिंग गतिविध‍ियों में सुधार होगा।
आईएमएफ ने यह भी कहा है कि वर्ष 2020 तक भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़त 5.8 फीसदी और आगे 2021 में और सुधरकर 6.5 फीसदी रह सकती है। सुस्ती आने की वजह को देखें तो आईएमएफ की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के गैर बैंकिंग वित्तीय सेक्टर में मुश्किल की वजह से घरेलू मांग तेजी से घटी है और कर्ज बढ़त की रफ्तार सुस्त हुई है। आपको बता दें कि यह अनुमान दावोस में चल रहे विश्व आर्थिक मंच (WEF) की बैठक के दौरान जारी किया है। इसके पहले आईएमएफ ने चालू वित्तवर्ष में 6.1 फीसदी बढ़त होने का अनुमान जारी किया था। गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने हाल में यह चेतावनी दी थी कि आईएमएफ जनवरी में भारत की वृद्धि के अपने अनुमान में उल्लेखनीय कमी कर सकता है। एक कार्यक्रम में गोपीनाथ ने कहा, ‘हम अपने आंकड़ों को संशोधित करते हुए जनवरी में नए आंकड़े जारी करेंगे। इसमें भारत के मामले में उल्लेखनीय रूप से कमी आ सकती है।’ इसके साथ ही गोपीनाथ ने सरकार के 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्‍य पर संशय जताया था।

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