नई दिल्ली। भारत को अंतरिक्ष तक पहुंचाने वाले वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के जन्मदिन पर गूगल ने डूडल समर्पित किया है। भारतीय स्पेस प्रोगाम की मदद से आम लोगों की जिंदगी सुधारने का सपना देखने वाले साराभाई का जन्म 12 अगस्त, 1919 को हुआ था।
विक्रम अंबालाल साराभाई भारत के प्रमुख वैज्ञानिक थे। इन्होंने ८६ वैज्ञानिक शोध पत्र लिखे एवं ४० संस्थान खोले। इनको विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में सन १९६६ में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। डॉ. विक्रम साराभाई के नाम को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम से अलग नहीं किया जा सकता। यह जगप्रसिद्ध है कि वह विक्रम साराभाई ही थे जिन्होंने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत को अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थान दिलाया। लेकिन इसके साथ-साथ उन्होंने अन्य क्षेत्रों जैसे वस्त्र, भेषज, आणविक ऊर्जा, इलेक्ट्रानिक्स और अन्य अनेक क्षेत्रों में भी बराबर का योगदान किया।

प्रारंभिक जीवन :

विक्रम साराभाई का जन्म 12 अगस्त 1919 को गुजरात, भारत के अहमदाबाद शहर में हुआ था. साराभाई के परीवार का उनके जीवन में बहोत महत्त्व था और वे एक अमीर व्यापारी परीवार से सम्बन्ध रखते थे. उनके पिता अम्बालाल साराभाई एक समृद्ध उद्योगपति थे जिन्होंने गुजरात में कई मिल्स अपने नाम कर रखी थी. विक्रम साराभाई, अम्बालाल और सरला देवी की 8 संतानो में से एक थे. अपने 8 बच्चों को पढाने के लिए सरला देवी ने मोंटेसरी प्रथाओ के अनुसार एक प्राइवेट स्कूल की स्थापना की, जिसे मारिया मोंटेसरी ने प्रतिपादित किया था, उनकी इस स्कूल ने बाद में काफी ख्याति प्राप्त की थी.
साराभाई का परीवार भारतीय स्वतंत्रता अभियान में शामिल होने के कारण बहोत से स्वतंत्रता सेनानी जैसे महात्मा गांधी, मोतीलाल नेहरू, रबीन्द्रनाथ टैगोर और जवाहरलाल नेहरू अक्सर साराभाई के घर आते-जाते रहते थे. इन सभी सेनानियो का उस समय युवा विक्रम साराभाई के जीवन पर काफी प्रभाव पडा और उन्होंने साराभाई के व्यक्तिगत जीवन के विकास में काफी सहायता भी की.
सितम्बर 1942 को विक्रम साराभाई का विवाह प्रसिद्ध क्लासिकल डांसर मृणालिनी साराभाई से हुआ. उनका वैवाहिक समारोह चेन्नई में आयोजित किया गया था जिसमे विक्रम के परीवार से कोई उपस्थित नही था, क्योकि उस समय महात्मा गांधी का भारत छोडो आंदोलन चरम पर था, जिसमे विक्रम का परीवार भी शामिल था. विक्रम और मृणालिनी को दो बच्चे हुवे- कार्तिकेय साराभाई और मल्लिका साराभाई. मल्लिका साराभाई अपनेआप में ही एक प्रसिद्ध डांसर है जिन्हें पालमे डी’ओरे पुरस्कार से सम्मानित कीया गया.
डॉ. साराभाई के व्यक्तित्व का सर्वाधिक उल्लेखनीय पहलू उनकी रूचि की सीमा और विस्तार तथा ऐसे तौर-तरीके थे जिनमें उन्होंने अपने विचारों को संस्थाओं में परिवर्तित किया। सृजनशील वैज्ञानिक, सफल और दूरदर्शी उद्योगपति, उच्च कोटि के प्रवर्तक, महान संस्था निर्माता, अलग किस्म के शिक्षाविद, कला पारखी, सामाजिक परिवर्तन के ठेकेदार, अग्रणी प्रबंध प्रशिक्षक आदि जैसी अनेक विशेषताएं उनके व्यक्तित्व में समाहित थीं।
उनकी सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता यह थी कि वे एक ऐसे उच्च कोटि के इन्सान थे जिसके मन में दूसरों के प्रति असाधारण सहानुभूति थी। वह एक ऐसे व्यक्ति थे कि जो भी उनके संपर्क में आता, उनसे प्रभावित हुए बिना न रहता। वे जिनके साथ भी बातचीत करते, उनके साथ फौरी तौर पर व्यक्तिगत सौहार्द स्थापित कर लेते थे। ऐसा इसलिए संभव हो पाता था क्योंकि वे लोगों के हृदय में अपने लिए आदर और विश्वास की जगह बना लेते थे और उन पर अपनी ईमानदारी की छाप छोड़ जाते थे।
विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र इसरो का सबसे बड़ा एवं सर्वाधिक महत्वपूर्ण केंद्र है। यह तिरुवनंतपुरम में स्थित है। यहाँ पर रॉकेट, प्रक्षेपण यान एवं कृत्रिम उपग्रहों का निर्माण एवं उनसे सम्बंधित तकनीकी का विकास किया जाता है। केंद्र की शुरुआत थम्बा भूमध्यरेखीय रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र के तौर पर १९६२ में हुई थी। केंद्र का पुनः नामकरण भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ॰ विक्रम साराभाई के सम्मान में किया गया।

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