नई दिल्ली। गलवान घाटी में भारत-चीन सीमा के बीच हुई हिंसक झड़प का असर दोनों देशों के रिश्तों पर भी देखा जा रहा है। जहां देशभर में चीनी सामानों को बैन करने की मांग उठ रही है वहीं महाराष्ट्र सरकार ने भी कुछ ऐसा कदम उठाया है जो चीन के लिए झटके के समान है। आपको बता दें कि राज्य सरकार ने केंद्र से बातचीत के बाद चीन की तीन कंपनियों के प्रोजेक्ट पर फिलहाल रोक लगा दी है।
बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने जिन चीन की कंपनियों के प्रोजेक्ट्स पर रोक लगाई है उनकी लागत करीब 5 हजार करोड़ रुपये की है। अब केंद्र सरकार की गाइडलाइन आने के बाद इस पर कोई फैसला लिया जाएगा। ऐसे प्रोजेक्ट में पुणे से सटे तालेगांव में इलेक्ट्रिक व्हीकल की बड़ी फैक्ट्री भी है। कहा जा रहा है कि ये करीब 3500 हजार करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट है। ये कंपनी 1000 करोड़ का निवेश करने वाली थी जिसमे 1500 लोगों को रोजगार मिलना था। इसके अलावा हेंगली इंजीनियरिंग नाम की कंपनी के साथ भी पुणे के तालेगांव में 250 करोड़ का निवेश करने का करार हुआ था जिससे 150 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना थी। वहीं ग्रेट वॉल मोटर्स ऑटोमोबाइल नामक कंपनी ने सबसे ज्यादा निवेश करने का करार किया था। करीब 3770 करोड़ रुपये का निवेश होना था जिससे 2042 लोगों के लिए रोजगार मिलने की संभावना थी। ऐसी कंपनियों से 15 जून को करार हुए थे। माना जा रहा है कि सीमा पर चीन की चालबाजी को देखते हुए खटास आई है। महाराष्ट्र सरकार ने पिछले दिनों 12 एमओयू पर साइन किए थे। सभी 3 चाइनीज कंपनियों के प्रोजेक्ट होल्ड पर डाल दिए गए हैं, जबकि 9 प्रोजेक्ट के काम फिलहाल जारी रहेंगे। इसमें दूसरे देशों की कंपनियां शामिल हैं। बता दें केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों से चीन के प्रोजेक्ट और आयात पर जानकारी मांगी थी। आपको बता दें कि इससे पहले टेलीकॉम ​डिपार्टमेंट भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) से 4G अपग्रेडेशन सुविधा में चीनी इक्विमेंट्स का इस्तेमाल नहीं करने नहीं करने का फैसला किया था। वहीं भारतीय रेलवे ने भी चीन में बनी चीजें इस्‍तेमाल करने से इनकार कर दिया है।

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