नई दिल्ली : अरब के अलावा खाड़ी देशों में नौकरी करने का सपना देखने वाली हिंदुस्तानी नौजवानों के लिए एक अच्छी खबर आयी है। यूएई सरकार ने कहा है कि अब भारत की यूनिवर्सिटी की डिग्रियों को भी अमेरिका और ब्रिटेन की यूनिवर्सिटियों के समान मान्यता दी जायेगी। कहने का मतलब यह कि जिस प्राथमिकता से अमेरिकी और ब्रिटिश डिग्रीधारियों को खाड़ी और अरब देशों में रोजगार मिलते थे उसी तरह अब भारतीय युवाओं को भी मिलेंगे। अबू धाबी में भारतीय दूतावास की ओर से जारी बयान के मुताबिक, भारतीय दूत नवदीप सिंह सूरी ने यूएई के शिक्षा मंत्री हुसैन बिन इब्राहिम से पिछले सप्ताह मिलकर भारतीय नागरिकों की समस्याओं पर चर्चा की थी। बाहरी या आंतरिक मार्क्स को लेकर अस्पष्टता के कारण कुछ भारतीय डिग्री को समान दर्जा से इनकार किए जाने के बाद यह बैठक हुई। बयान में कहा गया कि चर्चा के बाद संयुक्त अरब अमीरात के शिक्षा मंत्रालय ने इसे अधिसूचित कर दिया है। इसके तहत प्रमाणपत्र को लेकर सभी समतुल्य मापदंड पूरा करने वाली डिग्री को समान दर्जा देने पर कोई आपत्ति नहीं है ।
बयान के मुताबिक, जिन आवेदनों को पहले खारिज कर दिया गया था उनकी समीक्षा की जाएगी और प्रमाणपत्र से जुड़ी शर्तें पूरी करने के बाद उन्हें समतुल्यता का पत्र जारी कर दिया जाएगा। यूएई में भारतीय समुदाय सबसे बड़ा प्रवासी समूह है। तकरीबन 33 लाख प्रवासी भारतीय यहां रहते हैं। खाड़ी देश की कुल आबादी का यह 30 प्रतिशत है । खाड़ी देशों में हर तीसरा व्यक्ति भारतीय है। अब इस नयी घोषणा से अरब देशों के लिए वीजा की लाइन और लंबी हो सकती है। दरअसल, पिछले दिनों में भारत और यूएई के संबंधों में बहुत तेजी से घनिष्टता बढ़ी है। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूएई के शेख अल नाह्यान के परस्पर प्रयासों से अन्य क्षेत्रों में भी नये आयाम खुल रहे हैं।

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