शनि देव दंडाधिकारी है। माना जाता है कि न्याय करते वक्त शनि देव किसी से ना तो प्रभावित होते हैं और ना ही किसी से डरते हैं। शनि देव निष्पक्ष होकर न्याय करते हैं। वो सभी को कर्मों के आधार पर दंड देते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे लक्षण बताएंगे, जिसे देखकर आप भी अंदाजा लगा सकते हैं कि आपकी जन्म कुंडली में शनिदेव अशुभ तो नहीं है। साथ ही ये भी भी बताएंगे कि अगर शनिदेव अशुभ हैं तो उसे दूर करने के उपाय क्या है।
मकान की सुख ना मिल पाना इसका मतलब ये हुआ कि पूरी उम्र आप किराए के मकान में रहना पड़े अपना घर होते हुए भी उसका सुख ना मिल पाना।
जोड़ो मे दर्द होने लगे,शरीर मे अजीब सा दर्द व आलस रहने लगे।
नए लोगो से बात करने का मन ना करे जिस कारण लोगो द्वारा घमंडी समझा जाये।
अपने को सबसे ऊपर समझ ने लगे,बार बार छोटी मोटी बीमारी होने लगे।
मेहनत का फल मिलना कम हो जाए या कम होने लगे े
घर की मरम्मत कराते ही स्वभाव मे चिड-चिड़ापन बढ़ जाये। और कोर्ट कचहरी और हॉस्पिटल के धक्के खाने पड़ जाये।
नया मकान बनाते ही धन की कमी हो जाये मुसीबते बढ़ती जाये। या फिर किसी की मौत हो जाए।
किसी की सुनने का मन ना करे,चेहरे मे तेज की कमी हों जाए। सुंदरता मे गिरावट हो जाए,सिर के बाल पकने लग जाये।
चमड़े के जूते चप्पल आदि खोते चले जाए।
छत पर तरेड़ आ जाये जहां से सीलन आने लगे।
घर पर अजीब सी महक आने लगे े
मकानों से संबंधित व्यापार, या फिर जिसमें मशीनरी का उपयोग होता हो इस तरह के व्यापार में किसी भी प्रकार का व्यवधान आरहा हो व्यापार-व्यवसाय में मंदी, घाटा, दिवाला निकलने की स्थिति, बेशुमार कर्ज होता जा रहा हो।
कार्यों में आलस्य, टालमटोल, ढिलाई, सुस्ती, जिम्मेदारी से बचना, जवाबदारी के कार्यों में लापरवाही, स्वयं का लगातार छोटी-मोटी बीमारी से ग्रस्त रहना अथवा परिवार के किसी व्यक्ति का लंबी बीमारी से ग्रस्त रहना शनि का अनिष्ट प्रभाव है।
मकान के संबंध में समस्या एवं कोर्ट केस विवाद होना। परिवार वालें लोगों से धीरे-धीरे संबंध टूट जाना।
दुनियादारी की उस समझ से पीछे रहे जाना जिसकी सहायता से जीवन में आगे बढ़ा जा सकता है।
नशा करने की लत लग जाना। या अत्याधिक मात्रा में मास मदिरा का सेवन करने की प्रवृत्ति बन जाना।
यदि इस तरह का कोई भी लक्षण दिखे तो समझ लीजिए कि आपकी जन्म कुंडली में शनिदेव अशुभ हैं। यदि आप इस अशुभता को दूर करना चाहते हैं तो नीचे बताए गए उपाय करके आप शनि देव की अशुभता को दूर कर सकते हैं।
अशुभ शनि के अनिष्ट को दूर करने के सरल उपाय –
शनिवार के दिन साबुत काले उड़द (काले कपड़े में बांधकर), साबुत बादाम, लोहा इत्यादि शनि की वस्तुओं का अपनी सामर्थ्य अनुसार दान करें ।
शनिवार के दिन लोहे के कटोरे में सरसों का तेल भरके उसमे अपना मुह देखकर दान करें।
लोहे का चिमटा, लोहे का तवा गरीबो मे या किसी साधु-फकीर को दान करें।
विशेष कर जब सेहत में कोई दिक्कत आ रही हो तो 43 दिन पानी में थोड़ा दूध और कुछ चीनी मिलाकर उसे बड़ के पेड़ की जड़ में चढ़ाकर वहाँ की गीली मिट्टी से तिलक लगाएँ।
नित्य घर की पहेली रोटी निकालकर कौवों को डालें।
नियमित कुत्तों को रोटी खिलाएँ।
विशेष कर शनिवार को काली गाय को चारा खिलाएं।
चाँदी का चौकोर टुकड़ा हमेशा अपने पास रखें।
बबूल के पेड़ की डंडी से सुबह-शाम दातुन करें।
दक्षिणमुखी मकान में न रहे यह अनिष्टकारक हो सकता है, इससे बचने का प्रयास करें।
अपने मकान में गेहूं, चावल, चने की दाल एकत्रित कर के एक जगह पर रखें।
हनुमान जी के मंदिर जाकर उनसे शनि की अशुभता दूर करने के लिए प्रार्थना करें. हनुमान जी की उपासना करें।
मास मदिरा के सेवन परहेज करे। सट्टे-जुए से, अवैध-अनैतिक संबंधों का त्याग करे , झूठ से परहेज करे। अशुभ शनि के दुष्प्रभाव को दूर करने में बड़ा सहायक होगा।

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