नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एक बार फिर मोदी सरकार पर हमला बोला। राहुल गांधी ने मंगलवार को कोरोनावायरस संक्रमण की रोकथाम के मद्देनजर लागू राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन को विफल करार दिया। राहुल ने लॉकडाउन के कड़े नियमों में छूट दिए जाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए उनसे पूछा कि देश को पुन: खोलने की रणनीति क्या है?
उन्होंने केंद्र पर आरोप लगाते हुए कहा, केंद्र सरकार किसानों और श्रमिकों के हाथों में सीधे रुपये देने वाली राज्य सरकारों की मदद नहीं कर रही है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा, “दो महीने पहले प्रधानमंत्री ने कहा कि हम 21 दिनों तक कोरोनावायरस (कोविड -19) के खिलाफ युद्ध लड़ने जा रहे हैं और अब 60 दिन हो गए हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा, हम दुनिया के एकमात्र ऐसे देश हैं, जहां वायरस तेजी से बढ़ रहा है और हम लॉकडाउन को हटा रहे हैं। यह स्पष्ट है कि इसके लक्ष्य और उद्देश्यों की पूर्ति नहीं हुई और यह विफल हो गया है। राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री और उनके शीर्ष मेडिकल से जुड़े लोगों (विशेषज्ञों) सहित पूरे सलाहकार स्टाफ ने कहा कि मई में बीमारी कम होने लगेगी, जबकि मामले कम नहीं हो रहे हैं। संख्या और अधिक बढ़ रही है। उन्होंने कहा, विफल लॉकडाउन का परिणाम सभी के सामने है। हम कांग्रेस में यह समझना चाहते हैं कि आगे बढ़ने के लिए सरकार का दृष्टिकोण और रणनीति क्या है?
राहुल ने कहा, मैं प्रधानमंत्री और सरकार से पूछना चाहता हूं कि अब लॉकडाउन विफल रहा है, ऐसे में आगे बढ़ने और भारत को पुन: खोलने के संबंधि में रणनीति क्या है?
उन्होंने सरकार से यह भी प्रश्न किया कि इस बीमारी पर अंकुश लगाने के लिए वह क्या सावधानियां बरतने जा रही है और केंद्र कैसे प्रवासियों, राज्य सरकारों, एमएसएमई का समर्थन करने की सोच रहा है। यह भी कहा, हमें बहुत उम्मीदें हैं, आर्थिक पैकेज के बारे में कई प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आर्थिक पैकेज जीडीपी का 10 प्रतिशत है, जबकि वास्तविकता में यह जीडीपी का एक प्रतिशत है और शायद ही कोई नकद राशि लोगों को दी जा रही है। राहुल गांधी ने कहा, प्रत्यक्ष रूप से हम (राज्यों में कांग्रेस पार्टी की सरकारें) किसानों, मजदूरों को नकदी दे रहे हैं, लेकिन हमें केंद्र सरकार से कोई समर्थन नहीं मिल रहा है। हमारे राज्यों के लिए केंद्र सरकार से पर्याप्त समर्थन के बिना काम करना बेहद मुश्किल हो रहा है।

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