नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में प्रवासी मजदूरों की वापसी को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच बड़ा खुलासा हुआ है। कांग्रेस पर 1000 बसों की लिस्ट में बाईक, ऑटो, कार, एम्बुलेंस और अन्य एलएमवी वाहनों के नंबर शामिल करने का आरोप लगा है। वहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की ओर से भेजी गई एक हजार बसों की लिस्ट का योगी सरकार ने परीक्षण करा लिया है। इस परीक्षण में इन बसों की लिस्ट में कई भारी खामियां सामने आई हैं।
अपर पुलिस आयुक्त यातायात की ओर से इन सभी का वेरीफिकेशन किया गया। इसके नतीजे चौंकाने वाले थे। पहली खेप में जिन 54 बसों के परीक्षण किए गए, उनमें 4 ऑटो व थ्री व्हीलर थीं। दूसरी खेप में 196 बसों के परीक्षण किए गए। इनमें 11 ऑटो थे। एक एंबुलेंस व एक स्कूल बस थी। तीसरी सूची में 250 बसों के परीक्षण किए गए। इनमें 2 आटो व 62 ट्रक, डीसीएम, मैजिक व स्कूल बसें शामिल थीं।
चौथी सूची में 249 बसों के परीक्षण किए गए जिसमें 10 ऑटो/थ्री व्हीलर व 3 आटो व प्राइवेट कार थीं। इस तरह से कुुल 1049 वाहनों में 31 थ्री व्हीलर/ऑटो व 69 एम्बुलेंस, ट्रक, ऑटो थीं। जबकि 70 वाहनों का डेटा ही उपलब्ध नही था। आरटीओ की ओर से जब 492 वाहनों की फिटनेस के परीक्षण किए गए तो उसके भी चौंकाने वाले नतीजे सामने आए।
इनमें से 59 वाहनों की फिटनेस वैधता खत्म हो चुकी थी। 29 वाहनों का बीमा खत्म था। 3 वाहन ऑटो रिक्शा व कैब वाले थे। प्रियंका वाड्रा के निजी सचिव संदीप सिंह की भेजी लिस्ट के तत्काल बाद यूपी सरकार की तरफ से भी जवाब आ गया था। यूपी सरकार की ओर से कहा गया कि बसें नोएडा और गाजियाबाद भेज दी जाएं।
देर रात अपर मुख्य सचिव (गृह) अवनीश कुमार अवस्थी ने प्रियंका वाड्रा के निजी सचिव को पत्र लिखा कि सभी बसें लखनऊ स्थित वृंदावन योजना सेक्टर- 15 और 16 में पूर्वाह्न 10 बजे लाकर खड़ी करें। सभी बसों के चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस, परिचालकों के परिचय पत्र और बसों के फिटनेस प्रमाण पत्र जिलाधिकारी लखनऊ को सौंप दें। अनुमति पत्र दे दिए जाएंगे। मगर परीक्षण में इस सूची में भारी झोल सामने आया।

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