नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ में बड़े जोर शोर से किसानों की कर्ज माफी का वादा करके सत्ता में लौटी थी। खुद राहुल गांधी ने 10 दिन के भीतर सभी के कर्ज माफ कर देने का ऐलान किया था। मगर जमीनी हकीकत हैरान करने वाली है। कर्ज माफी की बात तो दूर रही, उल्टा किसानों को डिफाल्टर तक घोषित कर दिया गया। बैंक अब किसानों को न कोई लोन दे रहे हैं और न ही कोई सुविधा।
यह सब तब हो रहा है, जब धान की बुवाई का सीजन आ चुका है। हालत यह है कि धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में किसानों के सामने कटोरा उठाने की नौबत आ गई है। कर्ज माफी का वादा किए हुए 7 महीने बीत चुके हैं मगर किसानों के हाथ खाली हैं। बैंकों ने उनके अल्पकालीन कर्ज माफ करने से इनकार कर दिया है। यहां तक कि उन्हें डिफाल्टर भी घोषित कर दिया गया है जिससे कि वे आगे लोन न ले सकें। ऐसे में किसान भारी ब्याज पर बाजार से कर्जा लेने पर मजबूर हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ में दिसंबर में कांग्रेस की सरकार बनी थी।
कांग्रेस में 10 दिनों के भीतर कर्जा माफ करने का ऐलान करते हुए बड़े ही लुभावने आंकड़े जारी कर दिए थे। इन आंकड़ों के मुताबिक 16 लाख से किसानों को लाभ हुआ था और 61 सौ करोड रुपए का कर्जा माफ हुआ था। मगर हकीकत में कहानी दूसरी ही निकली।
सरकार ने चालाकी दिखाते हुए कर्ज माफी के दायरे में केवल उन्हीं किसानों को रखा जिन्होंने सहकारी बैंकों या फिर छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक से कर्ज लिया था। बाद में विपक्ष के भारी विरोध के चलते दूसरे बैंकों को भी शामिल किया। अब जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे खासे चिंताजनक हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक छत्तीसगढ़ के 7 सहकारी बैंकों को किसानों के 4047 करोड़ का कर्ज माफ करने के लिए पैसे ही नही दिए गए।

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