नई दिल्‍ली: दुनिया कोरोना से जूझ रही है और चीन अपने मंसूबों को पूरा करने के लिए पड़ोसी देशों की जमीन पर कब्‍जा करने में लगा है। भारत के बाद उसने जापान की तरफ अपने कदम बढ़ा दिए हैं। जापान ने कल ही भारतीय सीमा पर चीन के अक्रामक रवैया की आलोचना करते हुए इस मामले को शांतिपूर्ण तरीके से निटाने की बात कही थी। लेकिन आज चीन ने जापान के जलक्षेत्र में अपने जंगी जहाज भेज दिए हैं।
जापान सीमा में घुसे चीनी जहाज
जापान के तटरक्षकों ने जानकारी देते हुए कहा है कि आज ही चीनी गश्ती जहाजों ने जापानी जलक्षेत्र में प्रवेश किया है। अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, दो चीनी गश्ती जहाजों ने पूर्वी चीन सागर में सेनकाकू द्वीप समूह से पानी में प्रवेश किया। इसके अलावा उन्होंने क्षेत्रीय जल के अंदर एक जापानी मछली पकड़ने की नाव से संपर्क किया। तटरक्षक ने कहा कि यह चीनी जहाजों द्वारा प्रादेशिक जल में सबसे लंबी घुसपैठ थी।
जापान ने तैनात की मिसाइल
चीन की यह हरकत भारत-प्रशांत महासागर में निर्जन सेनकाकू/डियाओयू द्वीपों पर जापान के साथ उसके विवाद को तनाव की तरफ बढ़ने का इशारा करती है। 1972 से जापान का इन द्वीपों पर कब्‍जा है। हालांकि अप्रैल के बाद से जापान ने कथित तौर पर सेनकाकू द्वीपों के पास कम से कम 67 चीनी जहाजों को देखा है। अपनी समुद्री सीमा पर चीन के साथ बढ़ते तनाव को देखते हुए जापान ने पहले ही मिसाइलों को अपनी सीमा पर तैनात कर दिया है।
इससे पहले शुक्रवार को जापान ने भारत, ऑस्ट्रेलिया और यूके के साथ रक्षा खुफिया जानकारी का विस्तार करने की मांग की थी। जापान ने कथित तौर पर इन तीन राष्ट्रों को अपने राज्य रहस्य कानून में संशोधन करके इन देशों को शामिल करने का फैसला किया है। हालांकि जापान का पहले से ही अमेरिका के साथ एक ऐसी साझेदारी है।
22 जून को जापान के ओकिनावा में इशिगाकी सिटी काउंसिल ने सेनकोकू द्वीपों की प्रशासनिक स्थिति को बदलने के लिए “टोनोशीरो” का नाम बदलकर टोनोशीरो सेनकाकू” करने के लिए कानून को मंजूरी दी। जापान द्वारा 1972 से यहां पर प्रशानिक तौर पर कब्‍ता है, लेकिन दोनों देशों ने इन द्वीपों पर सौ साल से अधिक समय से अपना-अपना दावा किया हुआ है।
जापान ने किया भारत का समर्थन
पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत-चीन के बीच तनाव और यथास्थिति को बदलने के चीनी प्रयासों के कारण जापान ने भारत का समर्थन किया है। नई दिल्ली में जापानी राजदूत सतोशी सुजुकी ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला के साथ बात की। सुज़ुकी ने शांतिपूर्ण प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए भारत सरकार की नीति की सराहना की। उन्‍होंने कहा कि जापान एक शांतिपूर्ण समाधान के लिए आशा करता है और यथास्थिति को बदलने के किसी भी एकतरफा प्रयास का विरोध करता है।

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