मुंबई: सुशांत सिंह राजपूत और श्रद्धा कपूर का बेटा एक बिल्डिंग से गिर जाता है और अब गंभीर रूप से घायल है। कारण ये है कि वह सोचता है कि वह अपने माता-पिता की आंखों में हारा हुआ है। अस्पताल में अपने जीवन के लिए लड़ते हुए, उसके माता-पिता के साथ कॉलेज के 6-7 छिछोरे दोस्तों की कहानी क्या उसे बचा पाएगी? यह एक अलग कहानी है, समानता बस ये है कि इसके मूल में भी दोस्ती है और यहां तक कि फिल्म के एन्ड में एक स्ट्रांग मैसेज है। नितेश तिवारी का निर्देशन बहुत ही शानदार है। वह कहीं भी लड़खड़ाया नहीं है। ऐसा लगता है कि कहानी उनके दिल से सही निकली है और यह शो शुरू होने के पहले 15 मिनट में ही आपके साथ खूबसूरती से जुड़ जाती है। उनके पास कॉलेज के एक सीन में हंसाने और अगले ही पल सेट होने वाले सीन में रुला देने की अद्भुत क्षमता है। कहानी के साथ सीन बहुत सफाई से पिरोये गए हैं। ‘चिल्लर पार्टी ’, ‘भूतनाथ रिटर्न्स’ और ’दंगल’ के बाद लोग उनसे बहुत उम्मीद कर रहे थे, और उन्होंने छिछोरे से इस उम्मीद को पूरा किया है। फिल्म के सभी किरदार शानदार हैं। ज्यादातर बॉलीवुड फ़िल्में हीरो के कंधों पर होती हैं, लेकिन ‘छिछोरे’ इसका अपवाद बन गई है।

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