कहानी

Mumbai: फिल्म के पहले सीन से ही गोल्ड स्पॉट की बोतलों से लेकर ऊँची कमर वाले जींस पैंट तक आपको यह सोचने के लिए प्रेरित किया जाएगा कि जब आप 45 वर्ष के हो गए हैं तो आपका जीवन कैसे बदल गया है, वहीँ दूसरी तरफ आपको ये भी लगेगा कि आप अब उन दोस्तों के टच में क्यों नहीं रहे, जिनके बिना आप एक रुपया भी खर्च नहीं कर सकते थे। कुल मिलाकर फिल्म आपके कॉलेज जीवन के उन 4-5 वर्षों की याद दिला ही देगी। फिल्म में अमलेंदु चौधरी की सिनेमैटोग्राफी परफेक्ट है। जिस तरह से वह 1992 से सीन्स को आज के समय में सही सटीकता के साथ लाए हैं वह सराहनीय है।
प्रीतम के गीतों को सही फिट किया गया है क्योंकि वे कुछ ऐसा नहीं करते हैं जो आपको कहानी से दूर ले जाए। ज्यादातर गाने कहानी को आगे बढ़ाते नजर आते हैं। फिल्म का लास्ट गाना ‘फिकर नॉट’ भी अच्छी तरह से समयबद्ध है।
फिल्म के सभी किरदार शानदार हैं। ज्यादातर बॉलीवुड फ़िल्में हीरो के कंधों पर होती हैं, लेकिन ‘छिछोरे’ इसका अपवाद बन गई है। आप इसे सुशांत सिंह राजपूत की फिल्म या श्रद्धा कपूर की फिल्म नहीं कह सकते। यह एक ताहिर राज भसीन फिल्म है, यह वरुण शर्मा की फिल्म है और इसी तरह बाकी कलाकारों के लिए भी। हर एक्टर को उचित स्क्रीन स्पेस दिया गया है और बस फिल्म के स्पेशल कैरेक्टर को फोकस किया है।

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