झिलमिलाती रोशनी, रंग-बिरंगी ड्रेस, भक्तिमय संगीत और मस्ती भरे माहौल में डांडिया की थाप

Sunday, 29 September
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Monday, 7 October

UNN@: मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है।जिसकी शुरुआत पहले दिन कलश स्‍थापना के साथ होती है। इसके अलावा नवरात्रि में गरबा और डांडिया का भी एक अलग ही मजा है। इस पर्व के दौरान हर तरफ गरबा खेलने वालों की धूम होती है। इस दौरान बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक पारंपरिक अंदाज में गरबा का लुत्फ लेते हैं। गरबा का नवरात्रि से बेहद खास कनेक्शन भी है। दरअसल, ऐसा माना जाता है कि गरबा नृत्य मां दुर्गा को काफी पसंद हैं। नवरात्रि के दिनों में मां को प्रसन्न करने के लिए गरबा नृत्य किया जाता है। गरबा गुजरात और राजस्थान का में काफी प्रसिद्ध है, वहीं इसे लोग अपनी परंपरा से भी जोड़ते हैं। कॉलोनियों, सोसाइटियों और मोहल्लों में जहां माता की आरती पर गरबे खेले जा रहे हैं तो बड़े पार्टी प्लॉट्स और डोम्स में बॉलीवुड सॉन्ग्स पर डांडिया की धूम मची हुई है। गरबा नृत्य के वक्त लोग पारंपरिक परिधान पहनते हैं। लड़कियां जहां चनिया-चोली पहनती हैं तो वहीं लड़के गुजराती केडिया और सिर पर पगड़ी बांधते हैं। मां दुर्गा को पंसद इस नृत्य गरबा में ताली, चुटकी, खंजरी, डंडा या डांडिया और मंजीरा का काफी इस्तेमाल किया जाता है। गरबा में लोग एक समूह में मिलकर नृत्य करते हैं और साथ में देवी मां के गीतों को भी गाया जाता है। गरबा का नवरात्रि से कनेक्शन यहीं नहीं खत्म हो जाता है। गरबा को सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है इसलिए भी अश्विन मास की नवरात्रों को गरबा नृत्योत्सव के रूप में मनाया जाता है।

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