नई दिल्ली : मुसलमानों मुख्य त्यौहारों में से एक बकरीद (ईद-उल-अजहा) 1 अगस्त को है। कोरोना के संकट के इस दौर में भी भारत समेत दुनियाभर के मुसलमान इसकी तैयारी में जुटे हैं। हालांकि इस दौरान लोग सोशल डिस्टेंसिंग के लिए खास तैयारी भी कर रहे हैं। मुसलमान यह त्यौहार कुर्बानी के पर्व के तौर पर मनाते हैं। इस्लाम में इस पर्व का विशेष महत्व है। इस दिन लोग नमाज अदा करने के बाद बकरे की कुर्बानी देते हैं। यह त्यौहार लोगों को सच्चाई की राह पर सबकुछ कुर्बान करने का संदेश देता है।
बकरीद पर बकरों की कुर्बानी का खास महत्व है। लेकिन कोरोना के कारण इस बार हाट नहीं लगने से बकरे खरीदने में लोगों को दिक्कत हो रही है। लिहाजा बकारे व्यापारियों ने अब ऑनलाइन इसकी बिक्री शुरू कर दी है। मौलवियों का कहना है कि तीन दिवसीय त्योहार पैगंबर इब्राहिम के महान बलिदान को याद करने का एक अवसर है, जिन्होंने अल्लाह के आदेश पर अपने बेटे पैगंबर इस्माइल को कुर्बान करने की पेशकश की। अल्लाह के रहम से जब इस्माइल अपने बेटे की कुर्बानी देने चले तब उनके बेटे की जगह एक मेमना आ गया।
हैदराबाद में इस बार बकरीद के मौके पर कुर्बानी के लिए कोई जानवर खरीदने को बाजार में भागदौड़ करता नजर नहीं आ रहा है। कई मायने में इस बार का बकरीद अलग होगा। अब तक जिस तरह से यह त्योहार मनाया जाता रहा है, उसके मनाने के अंदाज को कोविड-19 ने बदल दिया है। एहतियात को ध्यान में रखते हुए ज्यादातर लोग जानवर खरीदने के लिए बाहर निकलने या घर पर कुर्बानी करने से बच रहे हैं। वे जानवर को मारने के लिए भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने या कसाई को बुलाने का जोखिम नहीं उठाना चाहते। इसलिए व्‍यापारियों ने ऑनलाइन बिक्री शुरू कर दी है। हर साल, सैकड़ों व्यापारी देशभर में बकरों अस्थायी बाजार और स्टॉल लगाते हैं। लेकिन इस बार अधिकांश व्यापारी अपने स्मार्टफोन पर संभावित खरीदारों के लिए जानवरों की तस्वीरें और वीडियो भेजकर और उनके भुगतान विकल्पों की पेशकश करके अपना व्यवसाय ऑनलाइन किया है। बड़ी तादाद में लोग वेबसाइट, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप के जरिए बकरे ख़रीद रहे हैं। बकरा ईद के खास त्‍योहार पर कुर्बानी देने के लिए बकरों की खरीदारी करने के लिए कई जगहों पर जगह भी निर्धारित की गई है ताकि लोगों की भीड़ एकत्रित न हो सके।

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